दो शब्द
मन कि भाबनाय उज्गार कर रहा हुँ आसा है कि आप को भि पसन्द आएगा...
Friday, September 10, 2010
आओ कहीं आग लगाये
आओ व्यर्थ विवाद खड़ा करे
एक दूजे का सर फोड़े
प्यार मोहब्बत भाड़ में जाये
आओ कुत्तो सा चीखे चिल्लाये
...एक दूजे को काट खाए
नोचे दबोचे गुत्थम-गुत्था हो जाये
आओ कहीं आग लगाये
एक दूजे का घर जलाये
उसी आग में स्वहः हो जाये
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