Tuesday, August 31, 2010
दो शब्द 22
इश्क का धुंआ अगर शादी के बाद उठे तो दमकल बनी बीवी पूरे शहर का पानी इश्किये पर छिड़क डालती है...
दो शब्द21
अगल बगल बैठी लड़की और घरेलु महिला के दिमाग में मछली ही घूमती है, एक फंसाने के लिए, और एक खाने के लिए...
मंदिर और मदिरालय
मंदिर और मदिरालय में है कौन बेहतर
ये सवाल एक छोटे बच्चे से पूछा ।
उससे,जो एक शराबखाने के बाहर,
बेचता है बर्फ हर शाम ।
कमर से बांधे रखता है प्लास्टिक का ग्लास
हाथों में एक मग और माचिस ।
पांच रूपये में रच देता है,जो
बार,खुले आसमां के नीचे ।
इसके बदले उसे मिलता है
चंद पैसे और शराब की खाली बोतलें
मुनाफे का सौदा है ये ।
ये जगह मुफिद है उसके लिये
धूल भरी गर्म शामों में भी ।
पर उसे बहुत मतलब नहीं
पास एक मंदिर से ।
उसे बस इतना मालूम है
कि,भगवान रहते हैं यहां ।
हजारों लोग आते हैं,
कुछ ना कुछ मांगने,
नई गाड़ी की पूजा कराने,
तो अच्छी नौकरी मांगने,
लेकिन इससे उसे क्या
रोटी तो नहीं मिल पाती यहां ।
प्रसाद भी लोग बड़ी दुकानों से खरीद लाते हैं
फूल बेचने के लायक पूंजी नहीं उसके पास ।
मंदिर से मिले प्रसाद के बाद भी,
भूख लगी रहती है उसे ।
लिहाजा मदिरालय ही,
बेहतर है उसके लिये ।
यहां वो शान से रहता है
क्योंकि उसे किसी से कुछ मांगना नहीं पड़ता ।
ये सवाल एक छोटे बच्चे से पूछा ।
उससे,जो एक शराबखाने के बाहर,
बेचता है बर्फ हर शाम ।
कमर से बांधे रखता है प्लास्टिक का ग्लास
हाथों में एक मग और माचिस ।
पांच रूपये में रच देता है,जो
बार,खुले आसमां के नीचे ।
इसके बदले उसे मिलता है
चंद पैसे और शराब की खाली बोतलें
मुनाफे का सौदा है ये ।
ये जगह मुफिद है उसके लिये
धूल भरी गर्म शामों में भी ।
पर उसे बहुत मतलब नहीं
पास एक मंदिर से ।
उसे बस इतना मालूम है
कि,भगवान रहते हैं यहां ।
हजारों लोग आते हैं,
कुछ ना कुछ मांगने,
नई गाड़ी की पूजा कराने,
तो अच्छी नौकरी मांगने,
लेकिन इससे उसे क्या
रोटी तो नहीं मिल पाती यहां ।
प्रसाद भी लोग बड़ी दुकानों से खरीद लाते हैं
फूल बेचने के लायक पूंजी नहीं उसके पास ।
मंदिर से मिले प्रसाद के बाद भी,
भूख लगी रहती है उसे ।
लिहाजा मदिरालय ही,
बेहतर है उसके लिये ।
यहां वो शान से रहता है
क्योंकि उसे किसी से कुछ मांगना नहीं पड़ता ।
दस क्षणिकाएँ
वार
पीठ पीछे का वार
तोड़ देता है
परिवार
२
जीवन मंथन
मुमकिन है गोते लगाना
मुश्किल है सीप से मोती लाना
ये जीवन मंथन है
३
दौर
जो दौर गुजर रहा है
हमारे आसपास से
डरने लगे हैं
अपने अहसास से
४
भ्रष्टाचार
कलियुग में भ्रष्टाचार
खड़ा है बाँह फैलाए
जीवन का यह चक्र
फिर भी घूमता जाए
५
शून्य
धीरे धीरे बारी बारी
रूठे मुझसे सब
शून्य को निहारता हूँ
रोता नहीं हूँ अब
६
कोशिश
एक टुकड़ा धूप ही सही
कभी तो मिलेगी
कोशिश करना ही जिंदगी है
७
कदम
आगे कुआँ पीछे खाई है
यहाँ किसने निभाई है
संभल कर रखो कदम
इसी में भलाई है
८
हिम्मत
काले घुप्प अंधेरे में
रौशनी की एक नन्हीं लकीर
देती है अँधियारा चीर
हिम्मत से
९
ग़ज़ल
आहों वेदनाओं से जब
नयन हुए सजल
कभी गीत कभी मुखड़ा
कभी बन गई गजल
१०
सत्कर्म
जिंदगी एक फूल है
जो महकती है
चहकती है
अपने सत्कर्मों से
पीठ पीछे का वार
तोड़ देता है
परिवार
२
जीवन मंथन
मुमकिन है गोते लगाना
मुश्किल है सीप से मोती लाना
ये जीवन मंथन है
३
दौर
जो दौर गुजर रहा है
हमारे आसपास से
डरने लगे हैं
अपने अहसास से
४
भ्रष्टाचार
कलियुग में भ्रष्टाचार
खड़ा है बाँह फैलाए
जीवन का यह चक्र
फिर भी घूमता जाए
५
शून्य
धीरे धीरे बारी बारी
रूठे मुझसे सब
शून्य को निहारता हूँ
रोता नहीं हूँ अब
६
कोशिश
एक टुकड़ा धूप ही सही
कभी तो मिलेगी
कोशिश करना ही जिंदगी है
७
कदम
आगे कुआँ पीछे खाई है
यहाँ किसने निभाई है
संभल कर रखो कदम
इसी में भलाई है
८
हिम्मत
काले घुप्प अंधेरे में
रौशनी की एक नन्हीं लकीर
देती है अँधियारा चीर
हिम्मत से
९
ग़ज़ल
आहों वेदनाओं से जब
नयन हुए सजल
कभी गीत कभी मुखड़ा
कभी बन गई गजल
१०
सत्कर्म
जिंदगी एक फूल है
जो महकती है
चहकती है
अपने सत्कर्मों से
दो शब्द19
पराई औरत और पराया मर्द कभी भी आपके घर में सेंध तो लगा देते हैं पर बच्चों की एक किलकारी मात्र उन्हे बाहर का रास्ता दिखा देती है
दो शब्द 16
पुरस्कृत शराबियों के पास
बचे हैं सिर्फ पीतल के तमगे
उपेक्षित शराबियों के पास
अभी भी बची है
थोडी सी शराब.....
बचे हैं सिर्फ पीतल के तमगे
उपेक्षित शराबियों के पास
अभी भी बची है
थोडी सी शराब.....
Sunday, August 29, 2010
दो शब्द16
अरबपति से अमीर विश्व भ्रमण किया हुआ यात्री, उस यात्री से अमीर एक चंडाल, उस चंडाल से अमीर एक वेश्या होती है....
दो शब्द15
तेरी याद खटमल सी चुपके से काट जाती है
कभी मच्छर बनी कानो में पास आ भुनभुनाती है
कछुवा छाप अगरबत्ती रुपी, दारु भी कुछ न कर पाती है
मुई शाम को चढ़ती है, और सुबह सेंसेक्स सी उतर जाती है
कभी पड़ोसन के बालों, तो कभी भजियावाले के टिंडे देख सताती है
अब तो तू मुझे कालोनी की कुतिया में भी नज़र आती है
ढाई अक्षर प्रेम का, साला अढाई लाख का बिल ले आया
अपने सारे बॉय फ्रेन्डों के रीचार्ज कूपनों का
कमीनी तुने मुझसे ही बिल भरवाया
हाय रे दैया, तुने मुझे ये क्या दिन दिखलाया
सेकंड हैण्ड मारूति कार से, तेरा इश्क मुझे साइकल पर ले आया
अब तूने सिम कार्ड ही नहीं, हैंडसेट तक बदल डाला
मुझ बनवारी लाल को छोड़, तूने बाबु धाकड़ से नाता जोड़ डाला
मेरा नेटवर्क जाम कर, तू तो एस .एम्म .एस सी फुर्र हुई
मेरी मज्नुई आशिकी तुझ फूलन देवी के आगे थक कर चूर हुई
पर मैं भी छोरा यू पी का, घुटने न टेक पाऊंगा
तेरे छिछोरे हैंडसेट से बढ़िया, एक और नई पटाउँगा
एस एम् एस गया भाड़ में , ईमेल से काम चलाऊंगा
बनवारी लाल से नाम बदल मैं भी "बैनी" बन जाऊंगा
सैकंड हैण्ड मारूति की जगह अब "नैनो" खरीद ले आऊंगा
और तुझे और तेरे धाकड़ को गज भर लम्बी जीभ दिखा चिढाऊंगा
कभी मच्छर बनी कानो में पास आ भुनभुनाती है
कछुवा छाप अगरबत्ती रुपी, दारु भी कुछ न कर पाती है
मुई शाम को चढ़ती है, और सुबह सेंसेक्स सी उतर जाती है
कभी पड़ोसन के बालों, तो कभी भजियावाले के टिंडे देख सताती है
अब तो तू मुझे कालोनी की कुतिया में भी नज़र आती है
ढाई अक्षर प्रेम का, साला अढाई लाख का बिल ले आया
अपने सारे बॉय फ्रेन्डों के रीचार्ज कूपनों का
कमीनी तुने मुझसे ही बिल भरवाया
हाय रे दैया, तुने मुझे ये क्या दिन दिखलाया
सेकंड हैण्ड मारूति कार से, तेरा इश्क मुझे साइकल पर ले आया
अब तूने सिम कार्ड ही नहीं, हैंडसेट तक बदल डाला
मुझ बनवारी लाल को छोड़, तूने बाबु धाकड़ से नाता जोड़ डाला
मेरा नेटवर्क जाम कर, तू तो एस .एम्म .एस सी फुर्र हुई
मेरी मज्नुई आशिकी तुझ फूलन देवी के आगे थक कर चूर हुई
पर मैं भी छोरा यू पी का, घुटने न टेक पाऊंगा
तेरे छिछोरे हैंडसेट से बढ़िया, एक और नई पटाउँगा
एस एम् एस गया भाड़ में , ईमेल से काम चलाऊंगा
बनवारी लाल से नाम बदल मैं भी "बैनी" बन जाऊंगा
सैकंड हैण्ड मारूति की जगह अब "नैनो" खरीद ले आऊंगा
और तुझे और तेरे धाकड़ को गज भर लम्बी जीभ दिखा चिढाऊंगा
दो शब्द 14
परमात्मा ने औरत बनाते समय शराब पी ली होगी, तभी वो ऊँची एड़ी वाले सैंडल पहन शराबियों सी चलती है, बहुत ज्यादा बोलती है, हर वक़्त सरदर्द की शिकायत करती है, नई गाडी ठोक देती है और हृदय रोग लगा देती है.....
एक सुबह का आविष्कार
सुबह कई बार खुद नहीं आती
सुबह कई बार पैदा की जाती
खुद सूरज को धकेल कई बार सूरज को लुडकाया जाता
तभी उसे पहाड़ों से धकेल धकेल किसी तरह सुबह उगाया जाता
चाँद को किसी तरह समझा बुझा कर, तारों को घुट्टी पिलाकर
उन्हे किसी तरह सुलाया जाता
क्यूंकि सुबह कई बार खुद नहीं आती है
सुबह किसी तरह कई आंसू रोने के बाद पैदा की जाती है
आज मैने एक नई सुबह खुद ही बना डाली
खुद ही को हार मैने किसी अपने को जीत दिला ही डाली
सुबह कई बार पैदा की जाती
खुद सूरज को धकेल कई बार सूरज को लुडकाया जाता
तभी उसे पहाड़ों से धकेल धकेल किसी तरह सुबह उगाया जाता
चाँद को किसी तरह समझा बुझा कर, तारों को घुट्टी पिलाकर
उन्हे किसी तरह सुलाया जाता
क्यूंकि सुबह कई बार खुद नहीं आती है
सुबह किसी तरह कई आंसू रोने के बाद पैदा की जाती है
आज मैने एक नई सुबह खुद ही बना डाली
खुद ही को हार मैने किसी अपने को जीत दिला ही डाली
Friday, August 27, 2010
दो शब्द12
मैँ मृत्यु सिखाने आया हूँ, जिसको मरना हो आ जाये।
युगधर्म बताने आया हूँ, सूली चढ़ना हो आ जाये॥
हिँसा, प्रतिहिँसा और अहिँसा मेँ अन्तर क्या होता है?
तल, अतल, वितल, ऊपर, नीचे, बाहर, भीतर क्या होता है?
क्या होता है जब फूँक-ताप कर प्रियजन वापस आते हैँ?
दो बूँद ढलकती आँखोँ से फिर दुनिया मेँ रम जाते हैँ।
व्यापार बताने आया हूँ, जिसको लुटना हो आ जाये।
मैँ मृत्यु सिखाने आया हूँ, जिसको मरना हो आ जाये॥
ब्रम्हा के सर्जन और विष्णु के पालन से हटकर शाश्वत।
भीषण, कराल यह रुद्र-धर्म,काली-कंकाली का मरघट।
शोणित,मज्जा और माँस युक्त, नर देह, सुघड़, श्यामल, सुंदर।
वासनायुक्त शुक बैठा है,जिह्वा मेँ राम, कनक पिञ्जर।
झिँझोड़ जगाने आया हूँ, जिसको उठना हो आ जाये।
मैँ मृत्यु सिखाने आया हूँ, जिसको मरना हो आ जाये॥
वह लोक जहाँ अन्याय नहीँ,पाखण्ड नहीँ,छल-छद्म नहीँ।
जो अजर, अमर, चेतन, शाश्वत,होने वाला है भस्म नहीँ।
जो शुद्ध-बुद्ध,कैवल्य धाम, अन्यायी पर है वज्रपात।
जो न्यायी,धर्मात्मा,व्यापक, जो धीर,वीर,अज और उदात।
वह मोक्ष दिलाने आया हूँ, जिसको मिटना हो आ जाये।
मैँ मृत्यु सिखाने आया हूँ, जिसको मरना हो आ जाये॥
युगधर्म बताने आया हूँ, सूली चढ़ना हो आ जाये॥
हिँसा, प्रतिहिँसा और अहिँसा मेँ अन्तर क्या होता है?
तल, अतल, वितल, ऊपर, नीचे, बाहर, भीतर क्या होता है?
क्या होता है जब फूँक-ताप कर प्रियजन वापस आते हैँ?
दो बूँद ढलकती आँखोँ से फिर दुनिया मेँ रम जाते हैँ।
व्यापार बताने आया हूँ, जिसको लुटना हो आ जाये।
मैँ मृत्यु सिखाने आया हूँ, जिसको मरना हो आ जाये॥
ब्रम्हा के सर्जन और विष्णु के पालन से हटकर शाश्वत।
भीषण, कराल यह रुद्र-धर्म,काली-कंकाली का मरघट।
शोणित,मज्जा और माँस युक्त, नर देह, सुघड़, श्यामल, सुंदर।
वासनायुक्त शुक बैठा है,जिह्वा मेँ राम, कनक पिञ्जर।
झिँझोड़ जगाने आया हूँ, जिसको उठना हो आ जाये।
मैँ मृत्यु सिखाने आया हूँ, जिसको मरना हो आ जाये॥
वह लोक जहाँ अन्याय नहीँ,पाखण्ड नहीँ,छल-छद्म नहीँ।
जो अजर, अमर, चेतन, शाश्वत,होने वाला है भस्म नहीँ।
जो शुद्ध-बुद्ध,कैवल्य धाम, अन्यायी पर है वज्रपात।
जो न्यायी,धर्मात्मा,व्यापक, जो धीर,वीर,अज और उदात।
वह मोक्ष दिलाने आया हूँ, जिसको मिटना हो आ जाये।
मैँ मृत्यु सिखाने आया हूँ, जिसको मरना हो आ जाये॥
Tuesday, August 17, 2010
दो शब्द 11
जिन्दगी ए जिन्दगी
तेरा कोई अतवार नहीं
हर कोई तेरा दम भरता है
मोत से किसी को प्यार नहीं
तुमसे हाथ छुडवा कर
कोई जाये तो कहाँ जाये
तुमे एक बार खो कर
कोई पाए तो कैसे पाए
तुमे बनाने मे कभी कभी
ये उम्र भी पड़ जाती है छोटी
तेरे आकार मे कोई ढले तो कैसे
बड़ी कठिन है तेरी कसोटी
फिर भी सभी को जरुरत है तेरी
क्योकि तेरे बिना ये संसार नहीं
जिन्दगी ए जिन्दगी
तेरा कोई अतवार नहीं
तेरा कोई अतवार नहीं
हर कोई तेरा दम भरता है
मोत से किसी को प्यार नहीं
तुमसे हाथ छुडवा कर
कोई जाये तो कहाँ जाये
तुमे एक बार खो कर
कोई पाए तो कैसे पाए
तुमे बनाने मे कभी कभी
ये उम्र भी पड़ जाती है छोटी
तेरे आकार मे कोई ढले तो कैसे
बड़ी कठिन है तेरी कसोटी
फिर भी सभी को जरुरत है तेरी
क्योकि तेरे बिना ये संसार नहीं
जिन्दगी ए जिन्दगी
तेरा कोई अतवार नहीं
Monday, August 9, 2010
दो शब्द 11
आप गैरो कि बात कर्ते है, हम्ने अप्नो को आज्माया है, लोग कान्टो से बच्कर चल्ते है, हम्ने फूलो से जख्म खाये है…
Sunday, August 8, 2010
दो शब्द 10
जिस जिस को हम्ने चाहा, उन सब ने दिल टोड दिया, टूटा है दिल इत्नी बार कि, दिल ने अब धड्कना हि छोड् दिया।
दो शब्द 9
एक्जाम पास आए, सिर मेरा दु:खाये टिचर ने न जाने क्यु, डन्डे दिखाए, अब तो मेरा सिर, जागे न सोता है, क्या करू हाए, कुछ कुछ होता है…।
Saturday, August 7, 2010
दो शब्द 8
मस्ती आन्खो मे होती है।।शराब मे नहि… भक्ती श्रद्धा मे होती है…शब्दो मे नही।। तु भि जान ले मेरे दोस्त्… दोस्ती दिल मे होती है।। दिखावेमे नहि…
दो शब्द 7
न जाने उश् पेर् इत्ना यकिन क्यु होता है, न जाने उस्का खयाल भि इत्ना हसीन क्यु होता है, सुना है प्यार का दर्द मित्था होता है , तो इस्स आँखा से निक्ला आसुँ नम्कीन क्यु होता है…
Friday, August 6, 2010
दो शब्द 7
चान्द ने कि होगी सुरज से मोहम्बत् इस्लिये तो चान्द मै न दाग है मुम्किन है चान्द से हुइ होगी बेवफाइ इस्लिये तो सुरज मै न आग है
दो शब्द6
फूल जब गुलाब क हो तो कान्तो से क्या दर्ना फूल जब गुलाब का हो तो कन्तो से क्या दर्न स्चूल् जब अप्ने बाप का हो तो तिचर् से क्या दर्ना …
दो शब्द 5
जिसे डिल् डिया वोह दिल्ली चली गयी, जिसे प्यार किया वोह इटली चली गयी, दिल् ने कहाँ खुद खुशी केर् ले जालिम, बिज्ली को हाथ लगाय टो बिज्ली चली गयी।
दो शब्द 4
वो आती तो है पर तन् से नही बाते कर्ती तो है पर मन् से नही कौन् केह्ता है “साहिल्” वो प्यार नही कर्ती वो प्यार कर्ती तो है पर हम से नही
Thursday, August 5, 2010
दो शब्द 3
सर झुकाओगे टो पत्थर देवता हो जाएगा इत्ना मत चाहो उसे वो बेवफ हो जाएगा हम भि डरिय हैन हुमेइन अप्ना हुनर मलूम है जिस टरफ् भि छल परैङे रास्ता हो जाएगा कित्नी सच्चै से मुझ से जिन्दगी ने केह डिया टु नहि न मेरा तो कोइ डूस्रा हो जाएगा मै ना खुद क नाम ले कर पी रहा हू न डोस्तो जेहर भि इस्स मेइ न अगर होगा दवा हो जाएगा सब उसी के है न हावा, खुश्बू, जमीन्-ओ-आस्मान मै न जहान भि जाऊङा उश को पता हो जाएगा रूथ जान टो मोहब्बात कि अलामत है मगर क्या खबर थि मुझ से वो इत्ना खफा हो जाएगा
दो शब्द 2
अंअन वाले सम्हाल कर राख्ना कुछ उजाले सम्हाल कर राख्ना जाने कब देश को जरूरत हो कुछ जियाले सम्हाल कर राख्न सच कि तजीम भि जरूरी है मुन्हा के छले सम्हाल कर राख्ना भूख का इम्त्यहाँन होना है कुछ निवाले सम्हाल कर राख्ना बाघा वलोन से जब भि घब्राओ डश्ता वले सम्हाल कर राख्ना
दो शब्द1
अप्ने ख्वबो कि तबिर कि खातिर मेरी चोट सा संसार क्योन उजर दाला याद कर वो दिन एक ईशारा पर मैने भरी मह्फिल मैन तुझे अप्नी दुल्हन बना दाला पर थोदी सि गुर्बाट को देख कर तुम ने मुझे बेइज्जत और बद्नम कर दला मैने हमेशा तुझे प्यार किया है पर तुने खुन के आसुँ रुला दाला टुम्हे रुथा हुँ मह्बुवा सम्झा था मैने पर तुने मुझ से बेवफै कर दला।
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