Thursday, August 5, 2010

दो शब्द 3

सर झुकाओगे टो पत्थर देवता हो जाएगा इत्ना मत चाहो उसे वो बेवफ हो जाएगा हम भि डरिय हैन हुमेइन अप्ना हुनर मलूम है जिस टरफ् भि छल परैङे रास्ता हो जाएगा कित्नी सच्चै से मुझ से जिन्दगी ने केह डिया टु नहि न मेरा तो कोइ डूस्रा हो जाएगा मै ना खुद क नाम ले कर पी रहा हू न डोस्तो जेहर भि इस्स मेइ न अगर होगा दवा हो जाएगा सब उसी के है न हावा, खुश्बू, जमीन्-ओ-आस्मान मै न जहान भि जाऊङा उश को पता हो जाएगा रूथ जान टो मोहब्बात कि अलामत है मगर क्या खबर थि मुझ से वो इत्ना खफा हो जाएगा

4 comments:

  1. सही बात है आप जिस तरफ भी आप चल पड़ेंगे रास्ता बन जाएगा.
    बस ये शब्दों को थोडा सा सही लिखें तो सभी को समझ में आएगा और हम सभी को आप की बात स्पष्ट रूप से समझ में आएगी.
    धन्यवाद.

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  2. शुभकामनाएं

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  3. Welcome. Improve and check your word error.

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  4. इस सुंदर से नए चिट्ठे के साथ आपका हिंदी ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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