मन कि भाबनाय उज्गार कर रहा हुँ आसा है कि आप को भि पसन्द आएगा...
Saturday, August 7, 2010
दो शब्द 7
न जाने उश् पेर् इत्ना यकिन क्यु होता है, न जाने उस्का खयाल भि इत्ना हसीन क्यु होता है, सुना है प्यार का दर्द मित्था होता है , तो इस्स आँखा से निक्ला आसुँ नम्कीन क्यु होता है…
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