हो जैसा भी नसीब मगर दिन तो कटेगा ही
भूख मिटाने को मुफलिस दिन रात खटेगा ही
ओ चश्मेतर, मुश्किल नहीं है मंजिले-हयात
कदम तो बढ़ाते रहो, रस्ता ये कटेगा ही
हमने भी देख लिया है वाइज का मोजीजा
होगी जो रूह रोशन तो अँधेरा छंटेगा ही
तुम कदम तो बढाओ, कुछ हौसला दिखाओ
तजाहुल है, मगर मुश्किल में साथ डटेगा ही
देगा वो मांगने से ही, बनना न खरीदार
मौला बड़ा ताजिर है वो तुझको जटेगा ही
जिससे भी मिलना सोचके समझ के ही मिलना
कांटो से दोस्ती में दामन तो फटेगा ही
भूल जा तू दुश्मनी सबको लगाता जा गले
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